वीबी-जी राम जी के कार्यों का होगा स्थलीय सत्यापन
हमीरपुर, 17 अक्टूबर। जिलाधिकारी अशोक कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह के साथ तहसील राठ के ग्राम नौरंगा में ग्राम पंचायत की गौशाला एवं विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने व्यवस्थाओं में मिली कमियों को एक माह के भीतर दूर करने तथा लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए। वी बी जी राम जी के कार्यों में अनियमितताओं और केवल अभिलेखों में काम दर्शाए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जिला स्तरीय टीम गठित कर स्थलीय सत्यापन कराने के निर्देश दिए। टीम मौके पर कराए गए कार्यों और अभिलेखों का मिलान करेगी। अनियमितता मिलने पर संबंधित दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान गौशाला में 127 छोटे-बड़े गोवंश संरक्षित मिले। जिलाधिकारी ने छोटे-बड़े पशुओं को अलग रखने, पर्याप्त भूसा एवं पशु आहार उपलब्ध कराने तथा शत-प्रतिशत ईयर टैगिंग और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि गोवंश सड़कों पर छुट्टा घूमते नहीं मिलने चाहिए। साथ ही पशुओं से संबंधित अभिलेख नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश दिए।इंडियन बैंक द्वारा स्वयं सहायता समूहों की कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) स्वीकृत नहीं किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को बैंक एवं अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) से समन्वय स्थापित करने को कहा। उन्होंने सभी 27 पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को सीसीएल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने शौचालय निर्माण, पोषाहार वितरण तथा अन्य विकास कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने और कमियों को एक माह के भीतर दूर करने के निर्देश दिए। एक माह बाद पुनः निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इस मौके पर विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि मनरेगा के वीबी-जी राम जी में परिवर्तित होने के बाद योजना में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि फेस ऑथेंटिकेशन ऐप पर सेंधमारी करते हुए मजदूरों की हाजिरी दर्ज किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। जनता की मेहनत की कमाई का लाभ वास्तविक मजदूरों तक पहुंचना सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन को ऐसे मामलों का संज्ञान लेकर स्थलीय जांच करानी चाहिए। साथ ही, फर्जी हाजिरी और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।




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